भारत के टॉय ट्रेनों की जानकारी(Toy Trains (Narrow Gauge) of India - Hindi Blog)

टॉय ट्रेन(Toy Train) यानी नैरो गेज(Narrow Gauge) जो पहाड़ों छुक-छुक चलती अकसर बॉलीवुड की फिल्मों में दिखाई देती रही है।  पहाड़ों और वादियों के सुंदर नज़ारों में सुरंगों, पुलों और तीव्र मोड़ों से गुजरती टॉय ट्रेन में सफर करना एक बहुत ही अच्छा अनुभव होता है।  भारत में अभी 5 स्थानों पर टॉय ट्रेन चल रही है। यह स्थान है महाराष्ट्र के नेरल से माथेरान(Maharashtra's Neral to Matheran), तमिलनाडु के ऊटी से कून्नूर(Tamilnadu's Ooty to Coonoor), पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जीलिंग(West Bengal's New Jalpaiguri to Darjeeling), हिमाचल प्रदेश के कालका से शिमला (Himachal Pradesh's Kalka to Shimla) और पंजाब के पठानकोट से जोगिंदरनगर(Punjab's Pathankot to Jogindarnagar)के मध्य में। इन सभी टॉय ट्रेन के मार्गों का निर्माण आज़ादी पूर्व अंग्रेज़ों के शासनकाल में हुआ था। पहले टॉय ट्रेन( Toy Train or Narrow Gauge) स्टीम इंजन से चलते थे लेकिन वर्तमान में लगभग सभी जगह डीजल इंजन का प्रयोग होता है। भारत में चलने वाली टॉय ट्रेनों(Toy Trains) के बारे में कुछ अद्भुत जानकारियां विस्तार से नीचे दे रहा हूँ। 

 कालका - शिमला टॉय ट्रेन  (Kalka to Shimla Toy Train)
कालका से शिमला(Kalka to Shimla) तक 96 किलोमीटर की दूरी लगभग 6 घंटे में पूरा होता है।  इसका निर्माण वर्ष 1898 से 1903 के मध्य में हुआ था। करीब 101 सुरंग, 860 ब्रिज और 900 से ज्यादा घुमावदार मोड़ से गुज़रती इस ट्रेन के रास्ते में बहुत ही सुन्दर हिमालय के पहाड़(Himalaya Range), जंगल और कस्बे दिखते हैं। यह यूनेस्को द्वारा विश्व के धरोहर स्थलों (UNESCO World Heritage Site) में शामिल है।  ब्रिटिश शासन की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को दिल्ली से जोड़ने के लिए इसको बनाया गया था। इस रूट पर कुल 18 खूबसूरत स्टेशन हैं। टॉय ट्रेन(Toy Train) के डिब्बे लकड़ी के बने होते है जो सर्दी के मौसम में ठंड से बचाते हैं। ट्रेन के छत काँच का बना होता है जो प्राकृतिक सुंदरता का दर्शन कराता है। मुझे इस ट्रेन से शिमला जाना बहुत ही अच्छा लगा। मेरा सुझाव है कि कालका से शिमला की यात्रा इस टॉय ट्रेन(Toy Train) से ज़रूर करे। आपको एक बहुत ही अच्छा अनुभव मिलेगा।   

 नेरल - माथेरान टॉय ट्रेन (Neral to Matheran ToyTrain)
नेरल(Neral) मुंबई के पास एक स्टेशन है जहाँ से माथेरान जो कि महाराष्ट्र का एक प्रमुख हिल स्टेशन के लिए टॉय ट्रेन(Toy Train) मिलता है। पश्चिमी घाट के शानदार घाटियों के बीच चलने वाली यह टॉय ट्रेन 21 किलोमीटर की दूरी को लगभग 2.5 घंटे पूरी करती है।  इसको वर्ष 1907 में शुरू किया गया। इसको यूनेस्को द्वारा विश्व के धरोहर स्थलों (UNESCO World Heritage Site) में शामिल करने की कोशिश चल रही है। मानसून में अत्याधिक बारिश के कारण यह रूट अक्सर बंद रहता है। खूबसूरत हरे भरे जंगलों और पहाड़ों वाले मार्ग पर चलने वाली यह ट्रेन माथेरान घूमने जानेवाले सैलानियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। माथेरान में घूमने के लिए बहुत सारे पॉइंट्स हैं जहाँ से सह्याद्रि रेंज(Sahyadri Range) के मनमोहक घाटों के दर्शन होते हैं।  यहाँ टॉय ट्रेन(Toy Train) से जरूर जाइये पूरी यात्रा यादगार हो जायेगा।

 न्यू जलपाईगुड़ी - दार्जीलिंग  टॉय ट्रेन (New Jalpaiguri to Darjeeling Toy Train)
इसे दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे(Darjeeling Himalayan Railway) के नाम से भी जाना जाता है। भारत के प्रसिद्ध हिल स्टेशन में से एक पश्चिम बंगाल में स्थित दार्जीलिंग को न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन से जोड़ता है। इसका निर्माण वर्ष 1879 से 1881 के बीच हुआ।  इस रुट की लम्बाई लगभग 89 किलोमीटर है जिसे यह ट्रेन 7 घंटे में पूरी करती है। यह यूनेस्को द्वारा विश्व के धरोहर स्थलों (UNESCO World Heritage Site) में वर्ष 1999 से शामिल है। टेढ़े मेढ़े रास्तों, बाज़ारों, कस्बों और खूबसूरत पहाड़ों से गुज़रती यह ट्रेन सैलानियों का दिल जीत लेती हैं। यहाँ से कंचनजंगा(Kanchenjunga) के बर्फ से भरे पहाड़ भी दिखाई देते हैं। इस टॉय ट्रेन(Toy Train) में स्टीम इंजन का अब भी प्रयोग होता है जिससे इस ट्रेन की सुंदरता और बढ़ जाती है।

 ऊटी - कून्नूर टॉय ट्रेन ( Ooty to Coonoor Toy Train)
तमिलनाडु में नीलगिरि के पहाड़ियों(Nilgiri Hills) में स्थित विश्वप्रसिद्ध हिल स्टेशन ऊटी(Udhagamandalam) में चलने वाली यह ट्रेन ऊटी से कून्नूर होते हुए मेट्टुपलयम तक लगभग 46 किलोमीटर की दूरी को 5 घंटे में पूरी करती है। इसे नीलगिरि माउंटेन रेलवे(Nilgiri Mountain Railway) के नाम से भी जाना जाता है। इसको वर्ष 1899 में शुरू किया गया। यह यूनेस्को द्वारा विश्व के धरोहर स्थलों (UNESCO World Heritage Site) में वर्ष 2005 से शामिल है। आपने बॉलीवुड स्टार शाहरुख़ खान और मलाइका अरोड़ा की फिल्म 'दिल से' का प्रसिद्ध गाना 'छैया छैया' तो देखा ही होगा जो इसी ट्रेन के छत पर फिल्माया गया है। चाय के सुन्दर बागानों का मनमोहक दृश्य दिखाती यह ट्रेन बहुत सारे सुरंगों और पुलों से गुज़रती हुई नीलगिरि के खूबसूरत पहाड़ों का दर्शन कराती है।

 पठानकोट - जोगिंदरनगर टॉय ट्रेन ( Pathankot  to Jogindarnagar Toy Train)
पंजाब के पठानकोट से हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर तक करीब 164 किलोमीटर की दूरी 10 घंटे में पूरी होती है। अगर हम भारत में चलने वाली अन्य टॉय ट्रेनों(Toy Train) से तुलना करे तो यह सबसे लम्बा रुट है। इसे काँगड़ा वैली रेलवे(Kangra Valley Railway) के नाम से भी जाना जाता है।  यह सबसे बाद में निर्माण की गयी परियोजना है जिसे वर्ष 1928 में बनाया गया।  इस ट्रेन के रास्ते में 33 स्टेशन बनाये गए हैं।

इस प्रकार हम देखते हैं कि देश विदेश के सैलानियों में टॉय ट्रेनों(Toy Train or Narrow Gauge Train) के प्रति जो आकर्षण है वह बहुत ही अद्भुत है।  इन ट्रेनों की सवारी से प्रकृति की खूबसूरती का मज़ा तो मिलता ही है साथ ही भारतीय रेल की विकासयात्रा का भी अनुभव होता है।  भारत के चारों दिशाओं (पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण ) में स्थित खूबसूरत हिल स्टेशनों में टॉय ट्रेनों की उपस्थिति इसके सुंदरता में नए आयाम जोड़ देते हैं।  इन स्थानों में घूमने जाना और टॉय ट्रेनों(Toy Train) में सफर करना एक बहुत ही यादगार पल देता हैं।  इन स्थानों पर घूमने परिवार या मित्रों के साथ जरूर जाइये।


Video Link Below 
1. Shimla Toy Train


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