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छठ पूजा : लोक आस्था का महापर्व ( Chhath Pooja - Hindi Blog )

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लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा(Chhath Pooja) मुख्य रूप से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखण्ड में मनाया जाता है। हालांकि इन क्षेत्रों के लोग रोज़गार और व्यापार के कारण देश और दुनिया के अलग अलग हिस्सों में रहने लगे है जिससे यह त्यौहार पूरे विश्व के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाने लगा है। यह सबसे कठिन व्रतों में से एक है जिसमें लगभग 36 घंटे तक बिना भोजन और पानी पिए व्रत रहना पड़ता है। छठ पूजा(Chhath Pooja) हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक षष्टी को मनाया जाता है। यूँ तो कहावत है की उगते सूरज को सभी प्रणाम करते हैं लेकिन यह महान भारतीय संस्कृति की विशेषता ही है जिसमें डूबते सूरज को भी प्रणाम किया जाता है। यह त्यौहार मानव जीवन के प्रकृति के प्रति प्रेम भाव का प्रदर्शन भी है। छठ पूजा(Chhath Pooja) के समय भोजपुरी भाषा में गाये जाने वाले कुछ गीत बेहद लोकप्रिय और दिल को छू लेने वाले होते हैं -  कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए,  बहंगी लचकत जाए,  होइँ ना बलम जी कहरियाँ, बहंगी घाटे पहुँचाये।  इस गीत के अलावा सुबह सूर्य भगवान को अर्घ देने के लिए सूर्योदय की प्रतीक्षा करते हुए यह गाना गाया जाता

पुरंदर किला : छत्रपति संभाजी महाराज की जन्मभूमि(Trip to Purandar Fort)

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महाराष्ट्र में पुणे(Pune) से 40 किलोमीटर दूर पश्चिमी घाट(Western Ghats) की पहाड़ियों में स्थित पुरंदर किला(Purandar Fort) ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण किला है। यह किला अभी भारतीय सेना(Indian Army) के नियंत्रण में है जहाँ भारतीय सैनिकों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील होने की वजह से ज्यादातर स्थानों पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने पर प्रतिबंध है। अगर हम इतिहास के पन्नों को पलटे तो पता चलता है की पुरंदर किले(Purandar Fort) का महत्व बहुत ज्यादा था। इस किले का निर्माण 11वीं  शताब्दी में यादव वंश(Yadav Dynasty) के शासकों ने करवाया था। कालांतर में यह किला पर्शियन राजाओं(Persian Kings) के कब्ज़े में चला गया। उसके बाद इस किले पर अहमदनगर और बीजापुर के शासन के अधीन रहा।  वर्ष 1646 ईसवी में कम आयु में ही छत्रपति शिवाजी(Chatrapati Shivaji) ने इस किले को जीत लिया। वर्ष 1657 ईसवी में छत्रपति शिवाजी(Chatrapati Shivaji) के पुत्र संभाजी महाराज(Sambhaji Maharaj) का जन्म इसी पुरंदर के किले(Purandar Fort) में हुआ। इस किले पर औरंगजेब की नज़र थी और उसने अपने से

महाराष्ट्र में गणपति महोत्सव(Ganpati Festival in Maharashtra)

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हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थ दिवस को बुद्धि और समृद्धि के देवता (The God of Wisdom and Prosperity) भगवान गणेश के जन्मदिवस को गणेश चतुर्थी(Ganesh Chaturthi) के रुप में पूरे भारत वर्ष बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में यह त्यौहार(Ganpati Festival) बहुत ही बड़े स्तर पर आयोजित किया जाता है। वर्ष 1893 ईस्वी से पहले भगवान गणेश की पूजा आमतौर पर घरों तक ही सीमित था। लेकिन अंग्रेज़ों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन(Freedom Movement) में पूरे देश को एकजुट करने के उद्देश्य से लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1893 ईस्वी में सार्वजनिक(Public) गणेश पूजा उत्सव(Ganpati Festival) का आयोजन किया। महाराष्ट्र में सर्वप्रथम इसकी शुरुवात हुई और लोग सार्वजनिक गणेश पूजा(Ganpati Festival) में बढ़ चढ़ के हिस्सा लेने लगे। इन आयोजनों से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन(Freedom Movement) में आम जनमानस को आज़ादी के लिए जागरुक करने और एकता के सूत्र में पिरोने में बहुत मदद मिली। तब से लेकर अब तक महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेश पूजा (Ganpati Festival) के साथ साथ घरों में भी गणपति पूजा बहुत बड़े स्त