समुद्र में मोती : अंडमान निकोबार द्वीप समूह की यात्रा (Andaman Trip - Hindi Blog)


यात्रा मात्र एक शब्द ही नहीं बल्कि अपने आप में एक ऐसी परिकल्पना है जो किसी भी मनुष्य में रोमांच का संचार कर देता है। यूँ तो मैंने बहुत से जगहों की यात्रायें की है लेकिन बचपन से किसी यात्रा के बारे में ज्यादा आकांक्षित था वो जगह बस एक ही था अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar Island)। वर्ष 2019 में विवाह के पश्चात अपनी पत्नी के साथ घूमने के लिए हमने इसी स्थान को चुना। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह एक केंद्र शासित प्रदेश है जो सुदूर बंगाल की खाड़ी के मध्य में स्थित है. यह 572 छोटे बड़े द्वीपों का एक समूह है जिसमे 37 द्वीपों पर लोग रहते हैं। 

अपने विवाह के पश्चात् मैं अपने पत्नी के साथ लखनऊ के चौधरी चरण सिंह विमानतल से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह(Andaman and Nicobar Island) की राजधानी पोर्ट ब्लेयर(Port Blair) में स्थित वीर सावरकर विमानतल की ओर वायु मार्ग से बढ़ चला। यह कोलकाता होते हुए 4-5 घंटे की लम्बी यात्रा था। आसमान से बंगाल की खाड़ी(Bay of Bengal) की नीली सतह को देखना अद्भुत अनुभव था। कुछ घंटो की यात्रा के उपरांत समुद्र के मध्य में खूबसूरत द्वीप समूह ऐसे नज़र आने लगे जैसे मोतियों की माला को किसी से बहुत ही सलीके से पिरोया हो।मन का रोमांच हिलोरे मार रहा था कि जैसे हम अपने सपनो के मंज़िल की ओर बस पहुंचने ही वाले हैं। हमारी यह यात्रा 6 रात्रि / 7 दिन की थी जिसको मैं प्रतिदिन के हिसाब से वर्णन करूँगा। 


➨ पहला दिन ( लखनऊ से पोर्ट ब्लेयर / सेलुलर जेल / कोरबिन कोव बीच )

सुबह 10 बजे हमारा विमान पोर्ट ब्लेयर के वीर सावरकर हवाई अड्डे(Veer Savarkar Airport) पर उतरा। हवाई अड्डे के निकास द्वार पे हमारे लिए गाड़ी खड़ी थी जिसके ड्राइवर रवि थे। रवि ने हमारे होटल "डी मरीना"(De Marina) तक पहुंचाने के क्रम में हमारा अभिवादन और स्वागत किया। होटल में ज़रूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद हम लोगो ने थोड़ा विश्राम किया। दोपहर 1 बजे हम लोग अपने ड्राइवर रवि के साथ सेल्लुलर जेल(Cellular Jail) देखने के लिए पहुंचे। इसे ही काला पानी की सजा भी कहा जाता था। इस जेल की नींव अंग्रेज़ो ने 1897 में रखी थी । इस तीन मंज़िली जेल में कुल 694 कोठरियां हैं जिसको इस ढंग से बनाया गया है कि बन्दी आपस में मेल मिलाप ना कर पाएं। ऑक्टोपस की तरह इसके सात शाखाएँ हैं जो मध्य में आपस में जुड़े हुए है। सबसे आखिरी में सावरकर कोठी(Savarkar Cell) है जहाँ वीर सावरकर ने अपने जीवन के 13 वर्ष (1911 -1924 ) गुज़ारे। सेलुलर जेल में घूमने के दौरान यह अनुभव करना ही भयानक था कि कैसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन इन जेलों में कैद होकर काटा होगा। जेल परिसर में ही एक फांसी घर है। इस जेल में बंदियों को दी जाने वाली भयानक यातनाओं के बारे बताने के लिए  तथा स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन परिचय के लिए एक राष्ट्रीय संग्रहालय एवं मेमोरियल भी है। 

सेलुलर जेल घूमने के बाद हम लोग पोर्ट ब्लेयर के पास स्थित कोरबिन कोव बीच(Corbyn Cove Beach) पहुंचे। यह एक बहुत ही खूबसूरत समुद्र तट है। नारियल के सुन्दर पेड़ों के नीचे  बैठकर नीले समुद्र को निहारना बेहद ही सुकून देने वाला था। नारियल पानी को हाथ में लिए हुए  रेत पर घूमने का मज़ा ही अलग था  कोरबिन कोव बीच पे कुछ अच्छा वक़्त बिताने के बाद हमें वापस सेल्लुलर जेल जाना था जहाँ 1 घंटे का लेज़र लाइट और साउंड शो होना था 

शाम होते ही लेज़र लाइट और साउंड शो(Laser Light & Sound Show) शुरू हुआ। इस शो में बॉलीवुड अभिनेता ओम पुरी जी की बेहद गंभीर आवाज़ में काला पानी और सेल्लुलर जेल में स्वतंत्रता सेनानियों पर ज़ुल्म और अत्याचार को उस जेल परिसर के एक पीपल की पेड़ की नज़रो से सुनाया गया है पीपल के पेड़ के द्वारा इस विवरण को सुनकर ही रूहें काँप जाती है। लेज़र लाइट और साउंड शो देखने के बाद अमर सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए और सेल्लुलर जेल की मिट्टी को नमन करते हुए हम लोग वापस अपने होटल विश्राम करने आ गए


 दूसरा दिन ( हैवलॉक आइलैंड  / स्वराज द्वीप  /  राधानगर बीच )

अगली सुबह हम लोगो को हैवलॉक द्वीप(Havelock Island) जिसका नाम अब परिवर्तित करके स्वराज द्वीप(Swaraj Dwip) कर दिया के लिए निकलना था। करीब 113 वर्ग  किलोमीटर में  फैला हैवलॉक द्वीप सफ़ेद बालू के बीचों वाला जगह है जो कोरल रीफ और  हरेभरे जंगलो से घिरा हुआ है यह द्वीप पोर्ट ब्लेयर से करीब 39 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित है

सुबह 6  बजे हमारे ड्राइवर रवि ने हमको  पोर्ट ब्लेयर के जेट्टी पे पंहुचा दिया जहाँ  से हैवलॉक द्वीप(Havelock Island) तक की यात्रा हमको क्रूज(Cruise) से करना था। क्रूज का नाम सी-लिंक(Sea Link) था जो बेहद ही खूबसूरत और आरामदायक था। लगभग 2 घंटे की रोमांचक यात्रा के बाद हम लोग 8 बजे हैवलॉक द्वीप पहुंच गए। वहाँ के ड्राइवर प्रकाश ने हमको हमारे बीच रेसॉर्ट "गोल्ड इंडिया बीच रेसॉर्ट"(Gold India Beach Resort) पहुँचा दिया यह बहुत ही खूबसूरत बीच रेसॉर्ट नारियल के बगीचों से घिरा हुआ है और समुद्र तट के सामने है नाश्ता करने के बाद करीब 11 बजे हम लोग राधानगर बीच के लिए निकले। प्रकाश रास्ते में राधानगर बीच(Radhanagar Beach) की विशेषताएं बता रहा था। 

राधानगर बीच(Radhanagar Beach) एक बहुत ही खूबसूरत बीच है जो सफ़ेद रेत, फिरोज़ी नीले रंग के पानी और हरे वनस्पतियों  के लिए मशहूर है। इस बीच को टाइम पत्रिका(Time Magazine) द्वारा एशिया के तीन बेहतरीन बीचों में रखा गया है। यहाँ लोग स्विमिंग(Swimming),स्नॉर्कलिंग(Snorkeling), फिशिंग(Fishing) और स्कूबा डाइविंग(Scuba Diving) करने आते है। हम लोगों ने इस बीच पर काफी देर तक तैराकी किया और उसके बाद बीच के किनारे लगे सुन्दर पेड़ो के नीचे  बैठकर जंगली फलों का स्वाद लिया। हम लोगों ने फिश स्पा(Fish Spa) का आनंद भी लिया जिसमे पैर को छोटी छोटी मछलियों के टैंक में रखना होता है। डॉक्टर फिश नाम की ये मछलिया आपके पैरों के डेड स्किन को खा जाती है  4-5 घंटे इस बीच पर कब गुज़र गए पता ही नहीं चला। लगभग 6 बजे हम लोग अपने रेसॉर्ट वापस आ गए। शाम को चाय पीने  के बाद हम लोग अपने रेसॉर्ट के सामने बने बीच पर टहलने गए सूर्यास्त के बाद हवा के ठंडे झोकों के साथ शांत एवं मनोहारी वातावरण में रेत पर पड़ते कदम मन को बेहद ही लुभा रहे थे


तीसरा  दिन (हैवलॉक द्वीप / स्वराज द्वीप  /  एलीफैंट बीच )

नाश्ता करने के बाद ड्राइवर प्रकाश ने हम लोगो को हैवलॉक द्वीप(Havelock Island)  के जेट्टी पे पहुँचाया जहाँ स्टीमर से एलीफैंट बीच(Elephant Beach) पे जाना था। एलीफैंट बीच हैवलॉक द्वीप के दूसरे कोने पर है जहाँ आप जंगल से ट्रैकिंग करके 30 मिनट में पहुंच सकते है। दूसरा रास्ता स्टीमर का है जिसमे 15 मिनट में यहाँ पहुँचा जा सकता है।  स्टीमर वाले रास्ते में एक सुन्दर सा हाथी की शक्ल का लाइट हाउस दिखता हैं जो रात में पानी के जहाज़ों को दिशा बताता है। 

एलीफैंट बीच(Elephant Beach) के लोकप्रिय होने का कारण है यहाँ होने वाला वाटर स्पोर्ट्स(Water Sports)। जेट स्की(Jet Ski), सी वॉक(Sea Walk), सोफा राइड(Sofa Ride), स्नॉर्केलिंग(Snorkeling) और पैरासेलिंग(Parasailing) करने के लिए यहाँ पर्यटकों की भीड़ रहती है। हम लोगो ने जेट स्की और सोफा राइड का आनंद लिया और पैरासेलिंग का टिकट लेकर अपनी बारी आने का इंतज़ार करने लगे। बीच पर उत्सव जैसा माहौल था। बीच पर सूख कर नीचे गिरे हुए पेड़ इसकी खूबसूरती को चार चाँद लगा रहे थे। यहाँ के फलों से भरे प्लेट और नारियल पानी का मीठा स्वाद  शरीर में स्फूर्ति का संचार कर रहा था जो पैरासेलिंग करने के लिए ज़रूरी भी था। करीब 1 घंटे के बाद हमारा नंबर आया। पैरासेलिंग के लिए 10-12  लोगो के समूह को एक छोटे से स्टीमर द्वारा समुद्र में खड़े एक विशेष स्टीमर पर ले जाया गया जो पैरासेलिंग के लिए ख़ास उपकरणों से लैस था। पैरासेलिंग वाला स्टीमर हम लोगो को समुद्र के और अंदर लेकर गया और बारी बारी से सबको पैरासेलिंग कराने लगा। पैरासेलिंग में शरीर को पैराशूट से बांधकर एक रस्सी से आसमान की ओर छोड़ा जाता है और जैसे जैसे स्टीमर चलता है वैसे ही हमारी ऊंचाई ऊपर होने लगता है। पैरासेलिंग करते समय मनमोहक हवाओं के बीच आसमान की ऊंचाइयों से नीचे देखने पर गाढ़े नीले समुद्र में स्टीमर और उससे उठने वाली दूधिया लहरें बेहद ही सुन्दर दृश्य बना रही थी। यह 15 मिनट का अद्भुत अनुभव रोमांचित करने वाला और कभी ना भूलने वाला पल था।  स्टीमर पे बैठे पूरे समूह को पैरासेलिंग करने में 2.5 घंटे का समय लगा। पैरासेलिंग करने के बाद हम लोग वापस एलीफैंट बीच पर आ गए। कुछ वक़्त बीच पे बिताने के बाद हम लोग स्टीमर से  हैवलॉक द्वीप के जेट्टी से होते हुए वापस अपने रेसॉर्ट आ गये। रात के भोजन लिए रेसॉर्ट के तरफ से बीच के किनारे कैंडल लाइट डिनर(Candle Light Dinner) की व्यवस्था थी। समुद्र के किनारे कांच  के बोतलों में रखे मोमबत्ती के उजाले में साफ़ सुथरे आसमान में टिमटिमाते तारों के नीचे बैठना मनोहारी था। पैर  के नीचे रेत की परते, लहरों की कलरव ध्वनि और टेबल पे रखे ताज़े फूलों की महक के बीच डिनर करना बहुत ही कमाल  का अहसास था।


चौथा दिन (नील आइलैंड/शहीद द्वीप/सीतापुर बीच / भरतपुर बीच / स्कूबा डाइविंग / लक्ष्मणपुर बीच )

दो दिन हैवलॉक द्वीप पर बिताने के बाद हम लोगो को अपने अगले पड़ाव नील आइलैंड(Neil Island) जिसका नाम बदल कर अब शहीद द्वीप(Shaheed Dwip) कर दिया गया है की ओर निकलना था। नील द्वीप(Neil Island) पोर्ट ब्लेयर के उत्तर पूर्व में लगभग 36 किलोमीटर तथा हैवलॉक द्वीप से दक्षिण में 18 किलोमीटर में स्थित है। तिकोने आकार का यह द्वीप अंडमान द्वीप समूह(Andaman and Nicobar Island) के ताज़े फलों और सब्ज़िओं का मुख्य स्रोत है।

हम लोग 9 बजे अपने क्रूज सी-लिंक से 1 घण्टे की यात्रा के बाद नील द्वीप पहुंच गए। ड्राइवर सुजीत ने हमको हमारे बीच रेसॉर्ट "टैंगो बीच रेसॉर्ट"(Tango Beach Resort) पहुंचाया। थोड़ा आराम करने के बाद हम लोग सीतापुर बीच(Sitapur Beach) के लिए निकले। यह बीच एक सूर्योदय पॉइंट था जहाँ समुद्र के अंदर से सूरज निकलता हुआ दिखता है। बीच के किनारे की हरियाली, यहाँ का सफ़ेद रेत और नीला पानी नहाने के लिए अच्छा विकल्प देता है। कुछ फोटो खींचने के बाद हम लोगो ने प्राकृतिक नज़ारों का लुफ्त उठाया।

सीतापुर बीच के बाद हम लोगों को भरतपुर बीच(Bharatpur Beach) जाना था जहाँ पर स्कूबा डाइविंग(Scuba Diving) करना था। स्कूबा डाइविंग में ऑक्सीजन सिलेंडर से लैस एक विशेष स्विमिंग ड्रेस पहनने के बाद समुद्र की गहराइयों में जल के अंदर के जीवन का दर्शन करना होता है। हमलोग स्कूबा डाइविंग के पेशेवर लोगों के साथ बोट में बैठकर समुद्र के अंदर एक पुराने टूटे हुए लाइट हाउस के पास पहुंचे। यह जगह अपने विशेष गहराई और लाइट हाउस के होने की वजह से स्कूबा के लिए बेहतरीन था। स्कूबा डाइविंग करवाने वाले प्रशिक्षित टीम में कुल 4 थे। जिसमे एक नाव चालक, एक स्कूबा डाइविंग के दौरान समुद्र के सतह से देखभाल करने के लिए तथा 2 स्कूबा डाइवर्स थे जिनको हम लोगो का स्कूबा करवाना था।  नाव में हम लोगो को सारे उपकरण की कार्यशैली और पानी के अंदर के संकेतों के बारे में बताया गया। नाव से समुद्र में उतरने के बाद मुँह से ऑक्सीजन कैलेंडर से सांस लेना सिखाया गया। सभी जरुरी प्रशिक्षण के बाद स्कूबा डाइविंग करने हम लोग समुद्र के अंदर जाने लगे। समुद्र के अंदर का नज़ारा बेहद ही खूबसूरत था।  कोरल , रंग बिरंगे पौधे और सुन्दर मछलियाँ बहुत ही अच्छी लग रही थी। बहुत सारे मछलियों का झुण्ड हमारे पास घूम रहा था। समुद्र के अंदर की दुनिया अतुलनीय और रंगीन थी। करीब 30 मिनट तक हम लोग पानी के अंदर ही रहे।  एक विशेष कैमरे से हमारा फोटो और वीडियो शूट भी हुआ। स्कूबा डाइविंग का बेहतरीन अनुभव लेने के बाद हम लोग अपने रेसॉर्ट वापस आ गए।

हमारे रेसॉर्ट से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर लक्मणपुर बीच(Laxmanpur Beach) था जहाँ एक सनसेट पॉइंट(Sunset Point) था। हमारे रेसॉर्ट के सामने बने बीच से उस पॉइंट का रास्ता रेत पे चलते हुए जाना था।  यह कोई पक्का रास्ता नहीं बल्कि जंगल और समुद्र के लहरों के मध्य में फैले रेत का था। हरे पेड़ों के झुरमुट और रेत से साथ मिले सफ़ेद शंख और सीपियाँ इस रास्ते को बेहद मनमोहक बना रही थी। हम लोग लहरों के पास ही चल रहे थे और पानी का पैरों से टकराना ऐसा महसूस  करा रहा था जैसे हमारा स्वागत वो अपने ढंग से कर रहा हो। लगभग 15 मिनट चलने के बाद हम लोग सनसेट पॉइंट पहुंच गए। यह पॉइंट द्वीप के सबसे पश्चिमी छोर पे स्थित हैं जो त्रिभुज के आकर का है।

यहाँ एक ओर जमीन है और बाकि तीन ओर नीला विशाल सागर। यहाँ काफी भीड़ थी। स्थानीय लोगों ने यहाँ मैगी ,चाय और पकोड़े के छोटे अस्थाई दुकानें रखी थी। इन दुकानदारों ने अपने दुकान के सामने लकड़ी के बेंच बना रखे थे जहाँ बैठकर मैगी और चाय के चुस्कियों के साथ सूर्यास्त का नज़ारा(Sunset View) मन को मोह लेने वाला था। जैसे जैसे सूरज सागर के आँचल में जा रहा था वैसे वैसे आसमान की लालिमा बढ़ती जा रही थी। सूर्यास्त के समय समुद्र का पानी किसी सोने की माला के तरह चमक रहा था और लहरों के बीच खड़े लोगों की परछाइयां एक विहंगम दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। 3 घण्टों का वक़्त कैसे गुज़र गया पता ही नहीं चला। हम लोग उन्ही रेत के रास्तों से होते हुए बाते करते करते वापस अपने रेसॉर्ट आ गए।


➨ पाँचवा दिन ( नील आइलैंड  / शहीद द्वीप    पोर्ट ब्लेयर मार्केट )

सुबह 8 बजे उठकर हम लोगो ने नाश्ता किया और अपने रेसॉर्ट के सामने नारियल के बगीचे और उसके सामने बने बीच पे टहलने के लिए गए। थोड़ी फोटोग्राफी करने के बाद हम लोगों को रेसॉर्ट से चेक आउट करना था। हमारे ड्राइवर सुजीत ने हमें नील द्वीप(Neil Island) के जेट्टी पे दोपहर 12 बजे पहुंचा दिया। 1 बजे हमारे क्रूज का प्रस्थान समय था। नियत समय पर हमारा क्रूज सी-लिंक पोर्ट ब्लेयर(Port Blair) के लिए रवाना हुआ। यह 2.5 घंटे की यात्रा थी लेकिन रास्ते में चक्रवात आ गया जिससे तेज़ बारिश होने लगा और लहरें  बहुत तेज़ और ऊँची उठने लगी। समुद्र की लहरें क्रूज के खिड़कियों से टकराने लगीं जो शीशे के बने थे। यह अनुभव थोड़ा डरावना सा लग रहा था क्योंकि हमारा क्रूज बहुत ही धीरे धीरे चल रहा था और काफी हिचकोले खा रहा था। तेज़ चक्रवात के क्रूज के फसने के कारन 2.5 घंटे की इस यात्रा को पूरा करने में 5 घंटे लग गए। जब समुद्र तट दिखने लगा तब कुछ जान में जान आयी। पोर्ट ब्लेयर के जेट्टी पर हमको ड्राइवर रवि मिला और उसने हम लोगो को वापस अपने होटल पंहुचा दिया।  

करीब 2 घंटे आराम करने के बाद हम लोग लोकल मार्किट में शॉपिंग करने के लिए निकले। यहाँ के स्थानीय मार्किट का मुख्य आकर्षण शंखों, सीपियों तथा मोती के बने हुए सुन्दर आभूषण तथा घर में सजावट के लिए हाथ से बने शो पीस हैं। यहाँ के बाजार में अंडमान निकोबार द्वीप समूह के विभिन्न जनजातिओं के लोगो की मूर्तियाँ भी मिलती हैं जो अपने ख़ास पहनावे की वजह से बहुत ही सुन्दर दिखती हैं।  हम लोगो ने ढेर सारी शॉपिंग किया और परिवार के लोगो के लिए उपहार भी खरीदे। शॉपिंग करने के बाद स्ट्रीट फ़ूड का भी लुफ़्त  लिया और वापस अपने होटल आ गए।


➨ छठा दिन ( बारातांग द्वीप   / जारवा जनजाति  / मैंग्रोव  वन  / लाइमस्टोन केव्स /  पोर्ट ब्लेयर )

बारातांग(Baratang) एक द्वीप है जो पोर्ट ब्लेयर से लगभग 101 किलोमीटर उत्तर दिशा में है। यहाँ जाने के लिए जंगल से होकर गुज़रना होता है जो कि एक जारवा फारेस्ट रिज़र्व(Jarawa Forest Reserve) है। हम लोग सुबह 3 बजे बारातांग(Baratang) के लिए सड़क मार्ग से निकले क्योंकि जारवा फारेस्ट रिज़र्व का गेट प्रतिदिन केवल 2 बार ही खुलता है। एक सुबह 6 बजे और दूसरा सुबह 9 बजे। हमलोगों ने 6 बजे का समय चुना था और लगभग 5  बजे जारवा जंगल के गेट पर पहुंच कर ज़रूरी परमिट लिया और 6 बजे गेट खुलने का इंतज़ार करने लगे। जारवा फारेस्ट रिज़र्व में सुबह 6 बजे गेट खुलने पर पर्यटकों के गाड़ियों का काफिला अंदर जाने लगा। सबसे आगे वन विभाग की गाड़ी थी। यह 40 किलोमीटर लम्बा घना जंगल जारवा जनजाति(Jarawa Tribe) का निवास स्थान है जो इस जंगल के मूलनिवासी है। हम लोगों ने जंगल के रास्ते में जारवा आदिवासी लोगों(Tribals) को देखा जो तीर धनुष लिए अपने पारंपरिक वेशभूषा में बहुत ही आकर्षक लग रहे थे। इन लोगो की बस्ती भी दूर से दिख रही थी । इन लोगो से हाथ मिलाने और खाने पीने की चीज़े देने की सख्त मनाही थी। वन विभाग के लोग इस बात का ख़ास ख्याल रख रहे थे कि जारवा लोगो को गाड़ी से चोट ना लगे। 

करीब 1 घंटे में हम लोग जारवा जंगल के दूसरे छोर पर पहुंच जहाँ से फेरी के माध्यम से हम लोग बारातांग द्वीप पहुंचे। बारातांग का मुख्य आकर्षण है यहाँ के मैंग्रूव के वन(Mangrove Forest) और लाइमस्टोन / चूना पत्थर के बने प्राकृतिक गुफाएं(Limestone Caves)। हम लोग एक स्टीमर पर बैठ कर लाइमस्टोन केव्स की और निकले। स्टीमर के रास्ते में मैंग्रोव के वनों(Mangrove Forest) से समुद्र के किनारे भरे पड़े थे। अपने लम्बे लम्बे जड़ों और विशेष रूप रंग के कारण ये वन बहुत अच्छे लग रहे थे। स्टीमर पर 20 मिनट की यात्रा के बाद जंगलों के बीच बने उस जगह पहुचें जहाँ से चूना पत्थर से बने प्राकृतिक गुफाएँ(Limestone Caves) देखने 2 किलोमीटर पैदल चलकर जाना था। लगभग 20 मिनट में हम लोग उन गुफाओं के प्रवेश द्वार पे पहुंच गए और इन गुफाओं की जानकारी के लिए एक गाइड ले लिया। शुरू में तो गुफा के अंदर थोड़ा उजाला था लेकिन जैसे जैसे हम लोग अंदर जाने लगे अंधकार बढ़ने लगा।  गुफायें सफ़ेद रंग के चूना पत्थर से प्राकृतिक रूप में बनी थीं। टॉर्च की रौशनी में हमारे गाइड ने हमको विभिन्न प्रकार की आकृतियों को दिखाया जिसमे शिवलिंग, हाथी की सूंढ़, कमल का फूल इत्यादि। यह गुफा प्रकृति द्वारा बनाया गया अद्भुत कृति था। इन् गुफाओं में हम लोगो ने 1 घंटा बिताया और स्टीमर से वापस बारातांग के फेरी तट पर पहुँच गए। यहाँ के स्थानीय ढाबा पर दोपहर का भोजन करने के बाद जारवा जंगल होते हुए वापस पोर्ट ब्लेयर(Port Blair) अपने होटल आ गए। 


➨ सातवा  दिन ( पोर्ट ब्लेयर से लखनऊ )

यह 6 दिन की यादगार यात्रा के बाद का घर वापसी का समय था। वीर सावरकर विमानतल से घर वापस जाने के क्रम में हम लोग अंडमान निकोबार द्वीप समूह(Andaman and Nicobar Island) में बिताये गए अपने यादगार पलों को संजो रहे थे। यहाँ के लोगों की आतिथ्य दिल को छू लेने वाला था। यहाँ के सफ़ेद रेत और नीले समुद्र को निहारना एक बहुत ही सुकून देने वाला पल था।  हरे भरे जंगल, मैंग्रोव के वन, वाटर स्पोर्ट्स, जारवा जनजाति और प्राकृतिक खूबसूरती हमारे अंडमान के यात्रा अद्वितीय बना दिया था। हमारे स्वतंत्र सेनानियों के बलिदान की कहानी कहता यहाँ का सेलुलर जेल आपके मन में शहीदों के लिए सम्मान भर देता है। कुछ ही देर में हमारा विमान आसमान में था जहाँ से अंडमान निकोबार के द्वीप(Andaman and Nicobar Island) मोतियों की तरह फिर से दिखने लगे। वाकई में समुद्र में मोती हैं अंडमान निकोबार द्वीप समूह।

 *********

➝ अंडमान एवं निकोबार द्वीप में ये करना ना भूलें   : पैरासेलिंग, स्कूबा डाइविंग, जेट स्की, सी वाक, फोटोग्राफी।
➝ अंडमान एवं निकोबार द्वीप कैसे पहुँचें  : सबसे अच्छा तरीका हवाई मार्ग से देश के सभी हिस्सों से जाया जा सकता है।  समुद्री मार्ग से कोलकाता , विशाखापट्टनम और चेन्नई से  पोर्ट ब्लेयर जा सकते है लेकिन समय काफी अधिक लगता है।  
अंडमान एवं निकोबार द्वीप  जाने का सबसे अच्छा समय :   अक्टूबर से अप्रैल
अंडमान एवं निकोबार द्वीप घूमने के लिए पर्याप्त दिन      :   6 रात  /  7 दिन 



















Video Links below:

1. Parasailing at Elephant Beach, Havelock Island, Andaman
2. Scuba Diving at Neil Island, Andaman
3. Mangrove Forest at Barataang, Andaman
4. Limestone Caves at Barataang, Andaman


Blogger Name: Pramod Kumar Kushwaha
For more information & feedback write email at : pktipsonline@gmail.com



इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कश्मीर : धरती का स्वर्ग (Trip to Kashmir : Paradise on Earth - Hindi Blog)

मालवण : सिंधुदुर्ग की शान ( Trip to Malvan - Hindi Blog )

महाबलेश्वर और पंचगनी : एक प्यारा सा हिल स्टेशन (Trip to Mahabaleshwar & Panchgani - Hindi Blog)

श्रीनगर : एक खूबसूरत शाम डल झील के नाम (A Memorable Evening in Dal Lake Srinagar - Hindi Blog)

चित्रकूट : जहाँ कण कण में बसे हैं श्रीराम (Trip to Chitrakoot - Hindi Blog)

प्राचीन गुफाओं और मंदिरों का शहर : बादामी, पट्टदकल और ऐहोले (Trip to Badami, Pattadkal & Aihole - Hindi Blog)

ऊटी और कुन्नूर : नीलगिरी का स्वर्ग (Trip to Ooty & Coonoor - Hindi Blog)

कास पठार : महाराष्ट्र में फूलों की घाटी (Trip to Kaas Plateau : Maharashta's Valley of Flower-Hindi Blog)

पालखी : पंढरपुर की धार्मिक यात्रा(Palkhi Yatra to Pandharpur - Hindi Blog)